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Khilkhilata Bachpan

  खिल -खिलाता बचपन   
 बचपन  सबके सुनहरे भविष्य का चाभी खिलखिला कर हंसता हुआ खुशियों और आनन्दों से भरा पल ।
      ‌ अपने संग ना जाने कितनी खट्टी  -मीठी यादें संजोए हुए यादों का कारवां , रंग-बिरंगी  -तितलियां और पंछियों के पीछे भागता हुआ, नदियों और तालाबों में तैरता हुआ, घर-आंगन में खिल - खिलाकर  हंसता हुआ बचपन।

          बचपन बहुत सुन्दर और रोमांच  से भरा वक्त होता है।
बचपन एक ऐसा अवस्था होता है जो बहुत ही सुंदर नाजुक  और कोमल कच्ची गीली मिट्टी   के  समान  होता   है। गीली मिट्टी को  कुम्हार जिस आकर (रूप) में ढालना चाहता है पूर्णं   रुप में ढ़ल जाता है चाहे वह घड़ा हो या गमला ठीक उसी प्रकार बच्चों  का बचपन होता है  जो शिक्षा , संस्कार तथा अनुशासन बचपन में मिलता है वह बच्चों के बाल मन पर जीवन भर के लिए अंकित हो जाता है और  अपना एक अमिट  छाप छोड़ जाता है  ।

      बचपन में मिले संस्कारों के दम पर ही वे एक  सभ्य  समाज का निर्माण कर पाते हैं और आगे चलकर महान सुभाष चंद्र बोस  ,लाल बहादुर शास्त्री तथा नरेंद्र मोदी जैसे महानायक बन पाते हैं  ।
       आज की इस भाग  - दौड़ भरी जिंदगी से परेशान हो कर हर व्यक्ति चाहता है कि वह फिर से अपने  बचपन में वापिस  लौट जाए। जहां रंग -बिरंगी दुनिया में सजी सपनों का घर उसका इंतज़ार कर रहा है, जहां न खाने की चिंता है और न ही कमाने का फिक्र बस अपने रचित नई  -नई खेलों में मदमस्त होकर खेलों  में खो जाना है ना आज की चिंता ना कल    की बस धुलो में अपना - अपना राजमहल बनाना और कुछ ही क्षणों में बिगाड़ देना है, नदियों -तालाबों और झरनों में नहाना, मछिलीयां पकड़ना, जंगल से लकड़ियां चुनना, खेतों से साग, घोंघा - घोंघी, केकड़ा पकड़ना। फलों से लदे पेड़ों पर चढ़ कर फल  तोड़ना बहुत मज़ा आता था किन्तु अफ़सोस बचपन दोबारा लौट कर नहीं आ सकता। 
         प्रकृति ने मनुष्यों बचपन के रुप में एक बेहद खूबसूरत उपहार भेंट किया है जो एक कली के समान होता है जो शिक्षा, संस्कार, पोषण और पानी पाकर खिलता है मुस्कराता है।
             आप सभी बच्चों से  मेरी आग्रह है कि आप अपने बचपन का  भर-पुर उपयोग करें खेंल -कूदे , पेड़ों पर चढ़े तथा रंग -बिरंगी पतियों को इकट्ठा करें पर हां  किसी को नुक्सान पहुंचाए बिना।
             आपका भविष्य आपके बचपन की नींव पर टिकी है। आप अपने बचपन पर ऐसा काम करिए कि बड़े होने पर उन कामों को याद कर अपने ं पर गर्व करे।  

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